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- संवादी सपने: वैज्ञानिक सपने देखते इंसान से बात करना कैसे सीख गएइतिहास के अधिकांश दौर में सपना एक बंद कमरा रहा है — जिसे आप बस जागने के बाद ही बयान कर सकते थे। फिर वैज्ञानिकों ने सपने से एक जान-बूझकर किया गया संकेत बाहर निकालने का रास्ता खोजा, और दशकों बाद किसी सोते और सपना देखते इंसान से रीयल-टाइम में दोतरफ़ा बातचीत तक कर दिखाई। यहाँ पढ़िए कि संवादी सपने काम कैसे करते हैं, और इसने क्या दिखाया है और क्या नहीं।
- क्या सुस्पष्ट सपने सचमुच होते हैं? विज्ञान ने इन्हें कैसे साबित कियासुस्पष्ट सपने (लूसिड ड्रीमिंग) पहली नज़र में ऐसी परिघटना लगते हैं जिसे कभी जाँचा ही नहीं जा सकता। फिर भी 1980 के दशक से नींद की प्रयोगशालाएँ इन्हें ठोस ढंग से साबित करती आ रही हैं — यहाँ तक कि सपने देख रहे लोगों से सीधे, उसी पल बातचीत भी कर चुकी हैं। पढ़िए, यह सब किस तरह संभव हुआ, इससे क्या सिद्ध होता है और क्या नहीं।